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बोलोराधे राधे
बोलो राधे राधे — रवि भाटिया

॥ राधे राधे ॥

यह सिर्फ एक फ़िल्म नहीं, एक भाव है...

एक भक्ति है... एक जागरण है...

20 अगस्त 2027 को सिनेमाघरों में
गौ माता

गौ माता

हमारी संस्कृति, हमारा स्वाभिमान

किसान

किसान

अन्नदाता का सम्मान, राष्ट्र की पहचान

गांव

गांव

हमारी जड़ें, हमारी पहचान

भक्ति

भक्ति

राधे राधे नाम से जीवन हो पावन

फ़िल्म के बारे में

एक पवित्र कहानी, हर दिल के लिए

यह फ़िल्म गौ माता, किसान और गांव की पवित्र कहानी है। इस फ़िल्म में गौ माता आकर्षण का केंद्र है।

गौ माता जीवन में सुख, शांति और भक्ति का प्रकाश भर देती है — यही इस फ़िल्म का मूल संदेश है।

॥ राधे राधे ॥

स्वामी श्री गोपालानंद सरस्वती जी महाराज

आशीर्वचन

एक सुन्दर और सार्थक प्रयास।

स्वामी श्री गोपालानंद सरस्वती जी महाराज

बोल राधे राधे एक ऐसी फिल्म है जिसमें जन्म से लेकर मृत्यु तक, आरोग्य से लेकर अध्यात्म तक, और अर्थव्यवस्था से लेकर आनंद तक—कैसे मनुष्य गाय माता से यह सब प्राप्त कर सकता है, इसका एक सुंदर मार्गदर्शन प्राप्त होगा।

31 वर्षों से गो पर्यावरण अध्यात्म चेतना पदयात्रा

हल्दी घाटी से संपूर्ण भारत वर्ष के प्रणेता

परम तपस्वी गो भैरव उपासक

स्वामी श्री गोपालानंद सरस्वती जी महाराज
फ़िल्म के पीछे की सोच

रवि भाटिया (लेखक एवं निर्देशक)

प्रेरणा

फ़िल्म के पीछे की सोच

भगवद गीता में, महाभारत के समय जब अर्जुन का संकल्प डगमगाने लगा था, तब भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन के माध्यम से समस्त संसार को दिव्य ज्ञान प्रदान किया। श्रीकृष्ण की शिक्षाओं से अर्जुन को पुनः स्पष्टता और शक्ति प्राप्त हुई, जिससे वह आगे बढ़कर अपना कर्तव्य पूर्ण कर सका।

"बोलो राधे राधे" की कहानी इन्हीं शिक्षाओं से प्रेरणा लेकर उन्हें एक आधुनिक किसान के संयुक्त परिवार के संदर्भ में पुनः प्रस्तुत करती है। यह दर्शाती है कि परिवार के भीतर बढ़ती इच्छाएँ किस प्रकार भावनात्मक और सामाजिक जटिलताओं को जन्म देती हैं, जो प्रत्येक पात्र के जीवन को आकार देती हैं। आज के समाज में, लोग प्रायः काम, क्रोध, मोह, लोभ और अहंकार के मोहजाल में फंस जाते हैं। यह जकड़न आत्म-नियंत्रण की हानि, आवेगपूर्ण कार्यों और कभी-कभी आत्म-विनाश की ओर ले जाती है।

यह फ़िल्म मानव मन की मूल प्रकृति को दर्शाती है, जो भौतिक सुखों, दुख, धन और वासना से प्रभावित होती है। यह गीता के शाश्वत ज्ञान को एक सामाजिक रूप से प्रासंगिक और समकालीन ढाँचे में प्रस्तुत करती है।

अपनी कथा के माध्यम से, यह फ़िल्म आधुनिक समाज में पशु वध की कठोर वास्तविकताओं को भी उजागर करती है, गौ माता की रक्षा का सशक्त संदेश देते हुए और सार्थक रिश्तों के क्षरण को रेखांकित करती है। यह संयुक्त परिवारों के बिखरने से उत्पन्न भावनात्मक पीड़ा को दर्शाती है, साथ ही सभी आयु वर्ग के दर्शकों के लिए एक रोचक पारिवारिक मनोरंजक फ़िल्म के रूप में अपनी पहचान बनाए रखती है।

यह कहानी राधा कृष्ण के सार और उपस्थिति को समकालीन जीवन में लाती है, उनकी शाश्वत आध्यात्मिक प्रासंगिकता को दर्शाते हुए। "बोलो राधे राधे" प्रेम, भक्ति और आनंद जगाने वाले भावपूर्ण संगीत से समृद्ध है।

संक्षिप्त कथा

फ़िल्म की कहानी

यह संघर्ष, त्याग, उपेक्षा और अंततः सच्चे मूल्यों की विजय की कहानी है।

यह एक संवेदनशील पारिवारिक ड्रामा है, जो एक साधारण किसान बंसीलाल और उसके परिवार के जीवन संघर्ष को दर्शाता है। बंसीलाल अपना पूरा जीवन अपने बेटों को शिक्षित करने और उन्हें योग्य इंसान बनाने में समर्पित कर देता है। वह दिन-रात खेतों में अथक परिश्रम करता है, ताकि उसके बेटे शिक्षा के माध्यम से एक सम्मानजनक जीवन प्राप्त कर सकें।

समय के साथ, उसके बेटे उच्च शिक्षित होकर शहरों में बस जाते हैं और अपने-अपने परिवारों में व्यस्त हो जाते हैं। परंतु जैसे-जैसे माता-पिता वृद्ध होते जाते हैं, उनके जीवन में अकेलापन और उपेक्षा बढ़ने लगती है। वही बेटे, जिन्हें उन्होंने संस्कारों और परिश्रम से पाला था, आधुनिक जीवन की तेज़ रफ़्तार में अपने माता-पिता के प्रति अपनी ज़िम्मेदारियाँ भूल जाते हैं।

विडंबना यह है कि सबसे छोटा और अशिक्षित बेटा — जिसे कभी तुच्छ समझा जाता था — अपने माता-पिता के दुख और संघर्ष में उनका सच्चा सहारा बनता है।

यह फ़िल्म यह संदेश देती है कि केवल शिक्षा ही जीवन को पूर्ण नहीं बनाती। भक्ति, मूल्य और अपनी जड़ों से जुड़ाव भी उतना ही आवश्यक है। आधुनिकता की इस दौड़ में, यदि मनुष्य अपनी परंपराओं और जड़ों से कट जाए, तो सफलता भी अधूरी रह जाती है।

"बोलो राधे राधे" एक अनूठी प्रयोगात्मक हिंदी फ़िल्म है, जो यह दर्शाती है कि आज के आधुनिक जीवन में भी दिव्य लीलाओं का अनुभव किया जा सकता है।

फ़िल्म की कहानी

भक्ति

यात्रा तीन अध्यायों में

मिथक से वर्तमान तक — बोलो राधे राधे की कथा तीन भावनात्मक अध्यायों में बुनी गई है।

०१

उत्पत्ति की कथा

समुद्र मंथन से प्रकट कामधेनु और सुरभि की गाथा, जहाँ से गौ माता की दिव्यता का आरंभ हुआ।

०२

गाँव की पुकार

आज के भारत में, एक किसान परिवार और एक गाँव की कहानी जो गौ माता की सेवा, भक्ति और संघर्ष के इर्द-गिर्द बुनी गई है।

०३

पुनर्जागरण

एकता और आस्था की विजय — राधे राधे नाम का वह संदेश जो हर सीमा और पीढ़ी को पार करता है।

एक भाव, अनेक भाषाएँ

बोलो राधे राधे

हिन्दी

बोलो राधे राधे नौ भाषाओं में प्रस्तुत — एक भक्ति, हर भाषा में गूंजती हुई।

गौ माता

क्यों पूजनीय हैं गौ माता

भारतीय संस्कृति में गौ माता को केवल एक पशु नहीं, बल्कि समस्त सृष्टि की पालनहार माना गया है।

कामधेनु

समुद्र मंथन से प्रकट कामधेनु को इच्छापूर्ति करने वाली दिव्य गौ माना जाता है — सभी गौओं की आदि माता।

धरती माता का प्रतीक

गौ माता को पृथ्वी के समान सहनशील और पोषण देने वाली माना जाता है, जो निःस्वार्थ भाव से सबका भरण-पोषण करती है।

अहिंसा और करुणा

गौ रक्षा भारतीय दर्शन में अहिंसा, करुणा और समस्त जीवों के प्रति सम्मान का सबसे बड़ा प्रतीक है।

पंचगव्य

दूध, दही, घी, गोमूत्र और गोबर — पंचगव्य का उपयोग आयुर्वेद और पूजा-अनुष्ठानों में सदियों से होता आया है।

गौ सेवा

गौ सेवा को भारतीय परंपरा में सर्वोच्च पुण्य कार्यों में गिना जाता है — सेवा, संरक्षण और सम्मान की भावना के साथ।

कृष्ण और गोचारण

भगवान श्रीकृष्ण का गौओं के साथ अटूट प्रेम — गोपाल और गोविंद के रूप में — गौ माता के महत्व को अमर करता है।

निर्देशक के बारे में

रवि भाटिया

बॉलीवुड इंडस्ट्री में एक भारतीय अभिनेता, लेखक, निर्देशक और फ़िल्ममेकर, जो टीवी विज्ञापनों, इन्फोमर्शियल्स और टेलीशॉपिंग कंटेंट में अपने काम के लिए व्यापक रूप से जाने जाते हैं। उनकी विशेषज्ञता फ़िल्म और टेलीविज़न दोनों में पटकथा लेखन, निर्देशन और संगीत रचना तक फैली हुई है।

वे प्रसिद्ध नाटक "आज की ताज़ा खबर" के साथ-साथ "मेरी भूत नगर की यात्रा" और "अल्फ़ाज़" पुस्तकों के लेखक भी हैं। अपने करियर के दौरान, उन्होंने 600 से अधिक विज्ञापन और कॉर्पोरेट फ़िल्में निर्देशित की हैं, जो सम्मोहक कथाओं और दृश्य रूप से आकर्षक सामग्री पर उनकी मज़बूत पकड़ को दर्शाती हैं।

उनका कार्य दर्शकों से जुड़ने वाली उच्च-गुणवत्ता की प्रस्तुतियाँ देने के सिद्ध ट्रैक रिकॉर्ड को दर्शाता है।

उन्हें अपने चर्चित संगीत एल्बम "चटनी-मिक्स" (2007) और "मोबाइलर सॉन्ग" से व्यापक ध्यान मिला। रवि भाटिया ने सीमित संसाधनों के साथ बनी "2 लिटिल इंडियंस" (2013) से अपने निर्देशकीय फ़िल्म करियर की शुरुआत की। इसके बावजूद, यह फ़िल्म 40 से अधिक ब्रांड्स, एनजीओ और संस्थानों के साथ-साथ हज़ारों स्कूलों से जुड़ी रही। बाद में इसे देशभक्ति श्रेणी के अंतर्गत कई भारतीय राज्यों में टैक्स-फ्री का दर्जा प्राप्त हुआ।

एक बहुमुखी पेशेवर के रूप में, उन्होंने तीन दशकों से अधिक समय तक विभिन्न विधाओं और प्रारूपों में काम किया है। अपनी रचनात्मक दृष्टि और तकनीकी सटीकता के लिए जाने जाने वाले, वे मज़बूत संचार और सहयोगात्मक कौशल के साथ अपनी परियोजनाओं के सुचारू क्रियान्वयन को सुनिश्चित करते हैं।

रवि भाटिया

सहयोग से

Gomata Seva Forum

गोमाता सेवा फोरम गौ माता की सेवा, संरक्षण और कल्याण के लिए समर्पित एक सामाजिक संगठन है, जो इस पुनीत अभियान में हमारे साथ जुड़ा है।

Rave Media

रेव मीडिया के बारे में

दो दशकों से अधिक के अनुभव के साथ, रेव मीडिया एक अग्रणी विज्ञापन और फ़िल्म निर्माण कंपनी के रूप में स्थापित हो चुकी है, जो विभिन्न प्रारूपों में उच्च-गुणवत्ता की सामग्री प्रस्तुत करती है। इसके पोर्टफ़ोलियो में 600 से अधिक रचनात्मक फ़िल्में शामिल हैं, जो कथा-कथन और दृश्य क्रियान्वयन में इसकी मज़बूत नींव को दर्शाती हैं।

टीम में कुशल पेशेवर शामिल हैं जो विचारों को प्रभावशाली दृश्य कथाओं में बदलने के लिए समर्पित हैं। गहरी उद्योग समझ और कहानी कहने के जुनून के साथ, रेव मीडिया ग्राहकों के साथ मिलकर परिष्कृत और प्रभावी परिणाम देने के लिए काम करती है।

कंपनी ने हिंदी फ़िल्म "टू लिटिल इंडियंस" का भी निर्माण किया है, जो आकर्षक, बड़े पैमाने की सिनेमाई सामग्री बनाने की इसकी क्षमता को दर्शाती है।

रेव मीडिया ने कई परियोजनाओं को सफलतापूर्वक पूरा किया है और अपने रचनात्मक क्षितिज का विस्तार करना जारी रखे हुए है। "बोलो राधे राधे" मज़बूत सांस्कृतिक और भावनात्मक कथा-कथन में निहित, वैश्विक स्तर पर गूंजने वाली फ़िल्म प्रस्तुत करने की दिशा में इसका अगला महत्वाकांक्षी कदम है।

मिशन और विज़न

हमारा मिशन

एक कहानी, एक संदेश — मानवता और सनातन संस्कृति के पुनर्जागरण की ओर।

फिल्म एक विशाल और प्रभावशाली माध्यम है। अच्छी और सार्थक कहानियों के माध्यम से हम समाज को समकालीन विषयों पर जागरूक कर सकते हैं और ऐसे संदेश दे सकते हैं, जो केवल मनोरंजन तक सीमित न रहकर मानव जीवन को दिशा देने का कार्य करें।

आज मनुष्य विज्ञान और विकास के नए दौर में पहुंच चुका है, लेकिन दुर्भाग्य से जागरूकता, संवेदनशीलता और सही दृष्टि के अभाव में मानव स्वयं ही जीव-जगत के प्रति हिंसक होता जा रहा है। जीव हत्या और पशु हत्या जैसे विषय हमारे समाज के सामने एक गंभीर प्रश्न बनकर खड़े हैं। जगह-जगह पशुओं को काटने और बेचने की दुकानें खुलती जा रही हैं।

ऐसे वातावरण में एक बड़ा प्रश्न उठता है — क्या ऐसी मानसिकता के साथ रामराज्य की कल्पना संभव है?

“बोलो राधे राधे” इसी प्रश्न को एक पारिवारिक और भावनात्मक कहानी के माध्यम से गाँव से शहर तक ले जाने वाली फिल्म है। यह किसी व्यक्ति या वर्ग के विरुद्ध नहीं, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और जीव मात्र के प्रति करुणा की आवाज है।

फिल्म का मूल संदेश है — धरती पर हर जीव को जीने का अधिकार है। मनुष्य को अपने स्वार्थ के लिए किसी निर्दोष जीव की हत्या करने का अधिकार नहीं है।

“बोलो राधे राधे” में परिवार, रिश्ते, संस्कार, कर्म, मानवीय संवेदनाएं और हमारे सनातन जीवन-मूल्यों को भगवद्गीता के विचारों के साथ जोड़ा गया है।

यह फिल्म यह समझाने का प्रयास करेगी कि सनातन संस्कृति केवल पूजा-पद्धति का नाम नहीं है, बल्कि करुणा, कर्तव्य, अहिंसा, सेवा, संस्कार और प्रत्येक जीव के प्रति सम्मान की जीवन-दृष्टि है।

गाँव की मिट्टी से लेकर शहर की आधुनिक जीवनशैली तक की यात्रा करते हुए यह कहानी दर्शकों के सामने एक ऐसा आईना रखेगी, जिसमें वे स्वयं से प्रश्न कर सकें —

हम किस दिशा में जा रहे हैं?

हमारे संस्कार हमें क्या सिखाते हैं?

और क्या हमारी प्रगति प्रकृति एवं जीव-जगत की कीमत पर होनी चाहिए?

हमारा विज़न

यह केवल एक फ़िल्म नहीं, बल्कि भारत की सनातन संस्कृति, भारतीय किसान, गौवंश, परिवार, सेवा, करुणा और राष्ट्र-चेतना को समर्पित एक सांस्कृतिक आंदोलन है।

गौधन को समृद्धि का प्रतीक माना जाना... सुबह गौसेवा... नंदी द्वारा खेतों की जुताई... गोबर से लिपे हुए घर... गोमूत्र एवं पंचगव्य का उपयोग...

यह संपूर्ण वातावरण दर्शकों को भारत की उस संस्कृति में ले जाएगा जहाँ गाय केवल पशु नहीं, बल्कि जीवन का आधार थी।

पहली बार हिंदी सिनेमा में गौ माता को केवल एक पशु नहीं, बल्कि संपूर्ण कहानी का केंद्रीय पात्र बनाया जा रहा है।

एक गौ माता की जीवन यात्रा के माध्यम से यह कहानी उन सभी लोगों को जोड़ती है जिनका प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष संबंध गाय से है।

ऐसी प्रामाणिक और संस्कारयुक्त फिल्में प्रतिदिन नहीं बनतीं।

“बोलो राधे राधे” केवल एक फिल्म नहीं, बल्कि सांस्कृतिक जागरण का एक प्रयास है।

हमारा उद्देश्य मात्र व्यावसायिक सफलता नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक चेतना का प्रसार करना है।

हम आपके मार्गदर्शन एवं आशीर्वाद के आकांक्षी हैं और अवसर मिलने पर फिल्म की विस्तृत प्रस्तुति देने हेतु उपस्थित रहेंगे।

बोलो राधे राधे

हमारा संदेश

राधारानी की कृपा और आप सब के आशीर्वाद से जब यह फ़िल्म बनकर तैयार होगी और रिलीज़ होगी, तो लाखों लोगों के जीवन में भगवान राधा कृष्ण की भक्ति का प्रकाश भर देगी।

संगीत

गीत-संगीत सूची

पहला भाग

  • मनभावन मथुरा, मेरो पावन वृन्दावन

    गायक - किशोर चतुर्वेदी, गीत एवं संगीत – रवि भाटिया

  • धर्म का मैं कर्म करूँ - प्रभु लाज तू मेरी रखना

    गायक - रसराज कृष्ण दास, शैलजा मिश्रा, शुभम आदिगौर, गीत - रवि भाटिया, संगीत - मनमान मिश्र

  • पतझड़ में पत्ते गिरते हैं, बादल सावन में बरसता है

    गायक - अगम निगम, गीत एवं संगीत - रवि भाटिया

  • देखो लाडली चली ससुराल बिदाई

    गायिका - डॉ. आभा आर दीक्षित, बोल – रवि भाटिया, संगीत - माधव गिरि

  • कोई नहीं है इस जग में मेरी गौमाता के जैसा

    गायक - अनूप जलोटा व रवि जैन, गीत एवं संगीत – रवि जैन

  • मोहे लगी तोरी धुन – सुन कृष्णा सुन

    गायिका - वैष्णवी भुयार, गीत एवं संगीत - रवि भाटिया

दूसरा भाग

  • कृष्णा कृष्णा - लव यू कृष्णा

    गायिका - तान्या सोजतिया, नताशा बिलिमोरिया, ऐश्वर्या नायर, गीत एवं संगीत - रवि जैन

  • चल उड़ मनवा - आसमान की ओर

    गायिका - दिव्यांशी मौर्या, गीत एवं संगीत - रवि भाटिया

  • मुझे तो रंग डाला

    गायक - विनीत सिंह, गीत एवं संगीत - रवि भाटिया

  • बोलू झूठ तो कसम राम की काला कौवा काटे

    गायक - भगवान सिंह सिंगोरिया, रायसेन मप्र, गीत एवं संगीत - रवि भाटिया

  • बोलो राधे राधे - टाइटल सोंग

    गायक - लव पोदार, बोल - लालू जी व रवि भाटिया, संगीत - शेखर सहगल

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